सम्मानित मित्रगण,
महाभारत की कहानियों के क्रम में प्रस्तुत है इसकी इक्कीसवीं कड़ी, जिसमें प्रस्तुत है ‘‘राजा नल’’ एवं ‘‘दमयन्ती’’ की कथा। यह कथा अत्यंन्त ही रोचक एवं पठनीय है। असल में जब यात्रा के क्रम में युधिष्ठिर महर्षि बृहदश्व से कहते हैं कि उनके जैसा दुर्भाग्यशाली राजा और कौन होगा? उनका राज्य हड़प लिया गया, उन्हें देश निकाला दे दिया गया, वे वन-वन भटक रहे हैं, उनकी पत्नी द्रौपदी को भी अपमानित किया गया आदि। तब महर्षि बृहदाश्व उन्हें सांत्वना देने के लिये नल एवं दमयन्ती की कथा सुनाते हैं कि इनके जीवन में तो अत्यधिक कठिन समय आया था। कथा बड़ी है, अतः इसे कई भागों में प्रस्तुत किया जायेगा। इसी कड़ी में प्रस्तुत है प्रथम भाग - ‘‘दमयन्ती का स्वयंवर - भाग 1’’।
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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1961&page=6&date=13-02-2017
सादर
विश्वजीत ‘सपन’
सम्मानित मित्रगण,
महाभारत की कहानी के क्रम में बीसवीं कहानी ‘‘देवयानी का हठ’’ का दूसरा एवं अंतिम भाग प्रस्तुत है। हमने पहले भाग में पढ़ा कि देवयानी और शर्मिष्ठा में झगड़ा होता है। देवयानी नगर से जाने की बात करती है और असुरराज वृषपर्वा उसे मनाते हैं। देवयानी इस शर्त पर रुकती है कि शर्मिष्ठा उसकी दासी बनकर रहेगी।
अब इस भाग में पता चलता है कि राजा ययाति का संबंध शर्मिष्ठा के साथ होता है और किस प्रकार देवयानी को इसका पता चलता है। तब वह क्या करती है? कैसे राजा ययाति अचानक बूढ़े हो जाते हैं और अपने उत्तराधिकारी का चयन करते हैं।
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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1949&page=10&date=08-02-2017
विश्वजीत ‘सपन’
सम्मानित मित्रगण,
महाभारत की कथाओं में उन्ननीवीं कड़ी के रूप में प्रस्तुत है ‘‘देवयानी का हठ’’ का पहला भाग। महाभारत के आदिपर्व में वैशम्पायन जी जनमेजय से देवताओं एवं असुरों के मध्य युद्धों एवं कच की संजीवनी विद्या को सीखने के बारे में बताया। इसी मध्य उन्होंने देवयानी एवं शमिष्ठा की कहानी भी बताई। देवयानी शुक्राचार्य की पुत्री थी और उसका झगड़ा असुरराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा के साथ हुआ करता था। एक दिन अवसर पाकर किस प्रकार देवयानी ने बदला लिया, इस कथा में वर्णित है।
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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1933&page=10&date=30-01-2017
विश्वजीत 'सपन'
सम्मानित मित्रगण,
महाभारत की कथा की कड़ी में सत्रहवीं कथा का प्रकाशन।
‘‘क्षत्राणी विदुला का उद्बोधन’’
सिंधुराज संजय के पराजित हो जाने पर वह भयभीत हो जाता है। युद्धभूमि छोड़कर भाग जाता है। उसकी माता विदुला को यह पसंद नहीं आता। तब वह किस प्रकार अपने पुत्र को प्रेरित करती है, ताकि संधुराज अपने खोये राज्य को प्राप्त कर सके। कर्तव्य से विमुख को अपने कर्तव्य पथ पर लाने की यह कथा सभी के जीवन के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है।
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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1884&page=10&date=16-01-2017
सादर
विश्वजीत ‘सपन’
प्रिय मित्रो,
महाभारत की कहानी की 16 वीं कड़ी प्रस्तुत है।
किस प्रकार अर्जुन को श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा के प्रति अनुराग होता है और किन परिस्थितियों में उसका हरण होता है, इस कहानी के माध्यम से जाना जा सकता है।
इसे पढ़ने के लिये नीचे दो लिंक दिये गये हैं। पहला सीधे समाचार पत्र पर ले जाता है तथा दूसरा उसके पीडीएफ पर। कोई भी लिंक पढ़ने के लिये प्रयोग में लाया जा सकता है।
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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1868&page=10&date=09-01-2017
आपके सुझावों एवं आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सादर
विश्वजीत ‘सपन’
सम्मानित मित्रगण,
महाभारत की कहानी का 13वाँ भाग आपके समक्ष प्रस्तुत है।
इस भाग में पौराणिक कथा ‘‘ओघवती के धर्म’’ के माध्यम से यह कहने का प्रयास किया गया है कि गृहस्थ धर्म यह कहता है कि अतिथि की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। आज हमारी संस्कृति के इस तत्त्व को हमने लगभग भुला दिया है। अतः पढ़ें और समझें कि हमारी संस्कृति का इस संबंध में क्या विचार है।
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सादर
सपन
मित्रो,
महाभारत की कहानी का तेरहवाँ भाग आपके लिये प्रस्तुत है।
देवी इन्द्राणी या शची के जीवन में जब कठिनाई आती है, तो किस प्रकार वे उनका सामना करती हैं। यह कथा महाभारत के उद्योग पर्व का है। इसे पढ़ें और पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया दें।
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सादर नमन
मित्रो,
महाभारत की कहानी का अगला भाग - ‘‘हिडिम्बा का प्यार’’। कुछ कहानियाँ बीच में नहीं आ सकीं, जिसका मुझे खेद है। इसे अवश्य पढ़ें और अपने विचार दें कि कैसी लगी? आपके सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।
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सादर
आपका ‘सपन’
महाभारत की कहानी का आठवाँ भाग प्रस्तुत है। प्रकाशित एवं पीडीएफ में। कृपया पढ़ें और अपने विचार प्रकट करें कि आपको यह कथा कैसी लगी। आपके सुझाव इसे और सुन्दर पठनीय बनाने में मेरे लिये सहायक होंगे, अतः आपके विचारों की प्रतीक्षा रहेगी। इस कथा को पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।
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आपका
विश्वजीत ‘सपन’
महाभारत कहानी का सातवाँ भाग। पढ़ें और अपने विचार प्रकट करें कि कैसी लगी कहानी। आपके सुझाव मुझे और बेहतर लिखने में मदद करेंगे। इसे पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।
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आपका
सपन