Thursday, February 16, 2017

दमयन्ती का स्वयंवर - भाग 1


सम्मानित मित्रगण,

महाभारत की कहानियों के क्रम में प्रस्तुत है इसकी इक्कीसवीं कड़ी, जिसमें प्रस्तुत है ‘‘राजा नल’’ एवं ‘‘दमयन्ती’’ की कथा। यह कथा अत्यंन्त ही रोचक एवं पठनीय है। असल में जब यात्रा के क्रम में युधिष्ठिर महर्षि बृहदश्व से कहते हैं कि उनके जैसा दुर्भाग्यशाली राजा और कौन होगा? उनका राज्य हड़प लिया गया, उन्हें देश निकाला दे दिया गया, वे वन-वन भटक रहे हैं, उनकी पत्नी द्रौपदी को भी अपमानित किया गया आदि। तब महर्षि बृहदाश्व उन्हें सांत्वना देने के लिये नल एवं दमयन्ती की कथा सुनाते हैं कि इनके जीवन में तो अत्यधिक कठिन समय आया था। कथा बड़ी है, अतः इसे कई भागों में प्रस्तुत किया जायेगा। इसी कड़ी में प्रस्तुत है प्रथम भाग - ‘‘दमयन्ती का स्वयंवर - भाग 1’’।


इसे पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।




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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1961&page=6&date=13-02-2017 



सादर
विश्वजीत ‘सपन’

Thursday, February 9, 2017

देवयानी का हठ - भाग 2

सम्मानित मित्रगण,

महाभारत की कहानी के क्रम में बीसवीं कहानी ‘‘देवयानी का हठ’’ का दूसरा एवं अंतिम भाग प्रस्तुत है। हमने पहले भाग में पढ़ा कि देवयानी और शर्मिष्ठा में झगड़ा होता है। देवयानी नगर से जाने की बात करती है और असुरराज वृषपर्वा उसे मनाते हैं। देवयानी इस शर्त पर रुकती है कि शर्मिष्ठा उसकी दासी बनकर रहेगी। 


अब इस भाग में पता चलता है कि राजा ययाति का संबंध शर्मिष्ठा के साथ होता है और किस प्रकार देवयानी को इसका पता चलता है। तब वह क्या करती है? कैसे राजा ययाति अचानक बूढ़े हो जाते हैं और अपने उत्तराधिकारी का चयन करते हैं।


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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1949&page=10&date=08-02-2017
 
विश्वजीत ‘सपन’

Friday, February 3, 2017

‘‘देवयानी का हठ’’ (भाग-1)


सम्मानित मित्रगण,

महाभारत की कथाओं में उन्ननीवीं कड़ी के रूप में प्रस्तुत है ‘‘देवयानी का हठ’’ का पहला भाग। महाभारत के आदिपर्व में वैशम्पायन जी जनमेजय से देवताओं एवं असुरों के मध्य युद्धों एवं कच की संजीवनी विद्या को सीखने के बारे में बताया। इसी मध्य उन्होंने देवयानी एवं शमिष्ठा की कहानी भी बताई। देवयानी शुक्राचार्य की पुत्री थी और उसका झगड़ा असुरराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा के साथ हुआ करता था। एक दिन अवसर पाकर किस प्रकार देवयानी ने बदला लिया, इस कथा में वर्णित है।


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विश्वजीत 'सपन'

Saturday, January 28, 2017

नागकन्या उलूपी की प्रेमकथा

सम्मानित मित्रगण,

महाभारत की कथाओं के क्रम में इस सप्ताह अठारवीं कथा ‘‘नागकन्या उलूपी की प्रेमकथा’’ का प्रकाशन ‘‘पवन प्रवाह’’ पर। 


किस प्रकार नागकन्या उलूपी को धनुर्धर अर्जुन से अनुराग होता है और उससे प्रेम करने लगती है। उससे विवाह करने के लिये वह क्या उपक्रम करती है तथा किस प्रकार अर्जुन धर्मसंकट में पड़ते हैं, इस कथा में दर्शाया गया है।


पढ़ें और आनंद लें।


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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1900&page=10&date=23-01-2017

सादर
विश्वजीत ‘सपन’

Saturday, January 21, 2017

क्षत्राणी विदुला का उद्बोधन

सम्मानित मित्रगण,

महाभारत की कथा की कड़ी में सत्रहवीं कथा का प्रकाशन।


‘‘क्षत्राणी विदुला का उद्बोधन’’


सिंधुराज संजय के पराजित हो जाने पर वह भयभीत हो जाता है। युद्धभूमि छोड़कर भाग जाता है। उसकी माता विदुला को यह पसंद नहीं आता। तब वह किस प्रकार अपने पुत्र को प्रेरित करती है, ताकि संधुराज अपने खोये राज्य को प्राप्त कर सके। कर्तव्य से विमुख को अपने कर्तव्य पथ पर लाने की यह कथा सभी के जीवन के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है। 



इसे पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।


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http://pawanprawah.com/paper.php?news=1884&page=10&date=16-01-2017 

सादर
विश्वजीत ‘सपन’

Thursday, January 12, 2017

राजकुमारी सुभद्रा का हरण

प्रिय मित्रो,

महाभारत की कहानी की 16 वीं कड़ी प्रस्तुत है। 


किस प्रकार अर्जुन को श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा के प्रति अनुराग होता है और किन परिस्थितियों में उसका हरण होता है, इस कहानी के माध्यम से जाना जा सकता है। 

इसे पढ़ने के लिये नीचे दो लिंक दिये गये हैं। पहला सीधे समाचार पत्र पर ले जाता है तथा दूसरा उसके पीडीएफ पर। कोई भी लिंक पढ़ने के लिये प्रयोग में लाया जा सकता है। 


http://pawanprawah.com/admin/photo/up1868.pdf 

http://pawanprawah.com/paper.php?news=1868&page=10&date=09-01-2017


आपके सुझावों एवं आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सादर
विश्वजीत ‘सपन’

Sunday, January 8, 2017

सावित्री की पतिभक्ति

महाभारत की कहानी का पन्द्रहवाँ भाग - ‘‘सावित्री की पतिभक्ति’’।
‘‘पवन प्रवाह’’ एक साप्ताहिक समाचार पत्र है, जो लखनऊ से प्रकाशित है।
आप सभी पढ़ें और अपने विचार प्रकट करें। आपके इस सहयोग का आकांक्षी।
पढ़ने हेतु नीचे दिये लिंक पर क्लिक करें।


http://pawanprawah.com/paper.php?news=1852&page=10&date=02-01-2017




http://pawanprawah.com/admin/photo/up1852.pdf

विश्वजीत ‘सपन’

Thursday, December 29, 2016

ओघवती का धर्म

सम्मानित मित्रगण,
महाभारत की कहानी का 13वाँ भाग आपके समक्ष प्रस्तुत है।
इस भाग में पौराणिक कथा ‘‘ओघवती के धर्म’’ के माध्यम से यह कहने का प्रयास किया गया है कि गृहस्थ धर्म यह कहता है कि अतिथि की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। आज हमारी संस्कृति के इस तत्त्व को हमने लगभग भुला दिया है। अतः पढ़ें और समझें कि हमारी संस्कृति का इस संबंध में क्या विचार है।
पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।


http://pawanprawah.com/admin/photo/up1833.pdf

सादर 
सपन

Saturday, December 24, 2016

देवी इन्द्राणी की दुविधा

मित्रो,
महाभारत की कहानी का तेरहवाँ भाग आपके लिये प्रस्तुत है।
देवी इन्द्राणी या शची के जीवन में जब कठिनाई आती है, तो किस प्रकार वे उनका सामना करती हैं। यह कथा महाभारत के उद्योग पर्व का है। इसे पढ़ें और पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया दें।
इसे पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।


http://pawanprawah.com/admin/photo/up1817.pdf
 
सादर नमन

Sunday, December 11, 2016

हिडिम्बा का प्यार

मित्रो,
महाभारत की कहानी का अगला भाग - ‘‘हिडिम्बा का प्यार’’। कुछ कहानियाँ बीच में नहीं आ सकीं, जिसका मुझे खेद है। इसे अवश्य पढ़ें और अपने विचार दें कि कैसी लगी? आपके सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।


इस कथा को पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।


http://pawanprawah.com/admin/photo/up1785.pdf

सादर
आपका ‘सपन’

Sunday, November 13, 2016

‘‘द्रौपदी के पाँच पतियों का रहस्य’’

महाभारत की कहानी का नौवाँ भाग प्रकाशित।

इस कथा को पढ़ने के लिये, नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।


http://pawanprawah.com/paper.php?news=1866&page=10&date=07-11-2016

आपके विचारों एवं सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।


विश्वजीत ‘सपन’

Wednesday, November 9, 2016

द्रौपदी का स्वयंवर

महाभारत की कहानी का आठवाँ भाग प्रस्तुत है। प्रकाशित एवं पीडीएफ में। कृपया पढ़ें और अपने विचार प्रकट करें कि आपको यह कथा कैसी लगी। आपके सुझाव इसे और सुन्दर पठनीय बनाने में मेरे लिये सहायक होंगे, अतः आपके विचारों की प्रतीक्षा रहेगी। इस कथा को पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें।

http://pawanprawah.com/admin/photo/up1850.pdf

आपका
विश्वजीत ‘सपन’

Sunday, October 9, 2016

दिव्यकन्या सत्यवती


महाभारत कहानी का सातवाँ भाग। पढ़ें और अपने विचार प्रकट करें कि कैसी लगी कहानी। आपके सुझाव मुझे और बेहतर लिखने में मदद करेंगे। इसे पढ़ने के लिये नीचे दिये लिंक को क्लिक करें। 

http://pawanprawah.com/admin/photo/up1785.pdf

आपका
सपन