Monday, February 3, 2014

हर-हर महादेव


मित्रों,
मनुष्य का कार्य निष्काम कर्म है, फिर भी जब किसी कार्य को कोई पाठक सराहे तो परमानंद की अनुभूति होती है. आज ऐसे ही एक सत्य से सामना हुआ तो लगा कि आप सभी से यह साझा करूँ. कभी मैंने इस पुस्तक का अनुवाद किया था वर्ष २०११ में और यह आज भी मुझे ख़ुशी देता है और जब तक आप पाठकों का आशीर्वाद रहेगा और भगवान् शिव की कृपा रहेगी यह कार्य निरंतर चलता रहेगा.
एक पाठक ने अपने ब्लॉग पर लिखा है और वह लिंक मैं यहाँ दे रहा हूँ और साथ ही उसका टेक्स्ट भी.

सादर
सपन

2 जुलाई सुबह 11 बजे, मै 'मेलूहा के मृत्युंजय' के बारे में अपने ब्लॉग पर लिख रहा हूँ...

अंग्रेजी कि एक किताब जो दैनिक जागरण के अनुसार हिन्दी में बेस्ट सेलर है अंग्रेजी कि इस किताब का नाम है 'The Immortals of Meluha' जिसे हिन्दी में 'मेलूहा के मृत्युंजय' नाम से विस्वजीत 'सपन' जी ने अनुवादित किया है.

वैसे यह दूसरा उपन्यास है जो मैंने ख़रीदा है और पहला उपन्यास है जो मैंने पूरा पढ़ा है.

 सबसे पहले इस किताब के अनुवादक के बारे में कहूगा कि क्या कमाल का अनुवाद किया है विस्वजीत 'सपन' जी ने .... एक भी शब्द ऐसा नहीं जो किसी अन्य भाष से लिया गया प्रतीत हो...फिर भी 100 पन्ने पढने के बाद अहसास होता है कि शुद्ध हिन्दी पढ़ रहा हूँ...
 इन्होने बड़ी ही सहजता से शिव के लिए 'आप' के बजाय 'तुम' भाव वाले वाक्यों का अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद किया है... जो शुरु में शिव जी का अपमान लगता है पर बाद में यही इस किताब कि बुनियाद बन जाता है....


2 comments:

  1. अभी आप के दिये हुये लिंक पर गया और पूरी पोस्ट को पढ़ा ... पढ़ने के बार किताब को पढ़ने की बेहद इच्छा हो रही है |
    आप का आभार |

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    1. शिवम् मिश्र जी, प्रतिक्रिया के लिए आभार। अवश्य पढ़ें, एक मनोरंजक कथा है और अवश्य ही आपको रुचिकर लगेगा।

      सादर नमन

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